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INS वेला (Vela) Submarine Kya hai|भारतीय नौसेना ने लॉन्च की आईएनएस वेला

INS वेला (Vela) Submarine.क्या है आईएनएस वेला पनडुब्बी, इसकी युद्धक क्षमता, कितना खरनाक है ? आईएनएस वेला बढ़ाएगा भारतीय फौज की ताकत।

भारत अपनी सीमा सुरक्षा को लेकर हमेशा चौकन्ना रहता है, इसके लिए तरह-तरह के हथियारों को खरीदते एवं स्वदेश में ही निर्माण करता रहता है। भारत अपने पड़ोसी दुश्मन देश से अपनी सुरक्षा तथा युद्ध के समय उन पर भारी पड़ने के लिए एक से एक हथियार को अपनी सेना में शामिल कर रहा है।

हाल ही में स्कॉर्पियन श्रेणी की चौथी पनडुब्बी आई एन एस वेला को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया।
आई एन एस वेला को यार्ड 11878 के नाम से भी जाना जाता है, इसे मई 2019 को लांच किया गया था तथा गहन समुद्री परीक्षण हथियारों एवं सेंसर, उपकरण की गहनता से जांच के बाद इसे पिछले दिनों भारतीय नौसेना को सौंपा गया।

INS वेला क्या है :-

यह स्कॉर्पियन क्लास की चौथी सबमरीन है, इसे भारत के मझगांव डॉक शिपयार्ड और फ्रांस के मेसर्स नेवल ग्रूप के द्वारा बनाया गया, यह प्रोजेक्ट 75 के तहत फ्रांस से तकनीकी सहायता के द्वारा बनाए जाने वाले 6 सबमरीन में से चौथी है।
यह एक परंपरागत डीजल इलेक्ट्रिक सबमरीन है, इसकी गति 37 किलोमीटर प्रति घंटा है, यह समुद्र की 350 मीटर गहराई में 21 दिनों तक रह सकता है, आई एन एस वेला स्टेल्थ तकनीक से लैस है तथा बहुत ही कम आवाज करती है जिससे इसके दुश्मन के रडार के पकड़ में आने की संभावना बहुत ही कम है।

इसकी सहायता से समुद्री सीमा की निगरानी की जाएगी, जरूरी सूचनाएं इकट्ठा करने में मदद मिलेगा, यह दुश्मन के पनडुब्बी को भी नष्ट करने में सक्षम है, इसकी सहायता से समुंद्र के अंदर विस्फोटक (mines) लगाया जाएगा। 6 टारपीडो तथा 18विध्वंसक हथियारों से लैस होगा और यह एंटी शिप मिसाइल से दुश्मन के युद्धपोत को भी नष्ट करने में सक्षम होगा।

प्रोजेक्ट 75 क्या है :-


1997 में रक्षा मंत्रालय ने 24 पनडुब्बी अधिकरण की योजना को मंजूरी दी थी। जिसे प्रोजेक्ट 75 के नाम से जाना जाता है।
1999 के कारगिल युद्ध के पश्चात सुरक्षा के मुद्दे पर फैसले लेने वाली कैबिनेट समिति ने अगले 30 सालों सालों में 24 पनडुब्बी निर्माण की योजना बनाई, इस योजना में तेजी लाते हुए पनडुब्बी निर्माण को दो प्रोजेक्ट प्रोजेक्ट
( P 75) और (P 75i ) बांट दिया, इसके अंतर्गत विभिन्न देशों के सबमरीन निर्माता कंपनी से तकनीकी सहायता लेकर भारत में पनडु्बी निर्माण की योजना थी जिसमें अट्ठारह परंपरागत डीजल इलेक्ट्रिक इंजन वाली तथा 6 परमाणु ऊर्जा चलित पनडुब्बी होगी।
प्रोजेक्ट 75 अंतर्गत 6 पनडुब्बी के कुल खर्च 23,000 करोड़ रुपए है।

प्रोजेक्ट 75 ( india) :-


यह प्रोजेक्ट 75 के अंतर्गत बनाए जाने वाले सबमरीन का ही उन्नत रूप होगा, इसमें अति अत्याधुनिक हथियार सेंसर एवं अन्य उपकरण लगे होंगे इसमें Air independent propulsion से लैस
तकनीक होगा।

Note :- AIP टेकनीक डीजल इलेक्ट्रिक इंजन से चलित पनडु्बी को अपने बैटरी को चार्ज करने के लिए उसे ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, जिसके लिए उसे सतह पर आना पड़ता है सत्तह पर आने से पनडुब्बी दुश्मन के रडार में आसानी से आ जाता है इस तकनीक के माध्यम से पनडुब्बी बिना सतह पर आए हुए ही अपना बैटरी चार्ज कर सकता है।

इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत बनने वाली पनडुब्बी को मझगांव डॉक शिपयार्ड तथा लार्सन एंड टर्बो कंपनी मिलकर पांच विदेशी कंपनी की सहायता से बना रही है इसके अंतर्गत बनने वाले 6 पनडुब्बी का खर्च 43000 करोड़ रुपए है।

भारत की पनडुब्बी :-

भारत के पास वर्तमान में 15 डीजल इलेक्ट्रिक इंजन तथा एक परमाणु इंजन पनडुब्बी है।

भारत के तीन श्रेणी की पनडुब्बी है-

कलवरी श्रेणी:-

इसे ही स्कॉर्पियन श्रेणी के पनडुब्बी कहा जाता है इसमें प्रोजेक्ट 75 के तहत 2005 में हुए भारत और फ्रांस के समझौते के अंतर्गत बनाई जाने वाली 6 पनडुब्बी आती है, आईएनएस कलवरी को 2017, आईएनएस खंडेरी को 2019, आईएनएस करंज को मार्च 2021 तथा आई एन एस वेला को पिछले दिनों भारतीय नौसेना को सौंपा गया इसके अंतर्गत पांचवी पनडुब्बी आई एन एस बागीर को नवंबर 2020 को समुद्री परीक्षण के लिए लांच किया गया तथा छठी पंजाबी आई एन एस वागशीर अभी बनाया जा रहा है।

सिंधुघोष श्रेणी :-


इसे किलो श्रेणी की पनडुब्बी भी कहा जाता है इसे रसिया के सहायता से बनाया गया है, इसमें 8 पनडुब्बी सिंधुघोष ,सिंधुध्वज, सिंधुराज, सिंधुरत्न, सिंधु केसरी, सिंधुकृति, सिंधुविजय, सिंधुराष्ट्र है।

शिशुकुमार श्रेणी:-


इसे टाइप 209 श्रेणी की पनडु्बी भी कहा जाता है और इसे जर्मनी के सहायता से बनाया गया, इसमें चार पनडुब्बी शिशुकुमार, शंकुल शल्की शंकुश है।

यह सभी पनडुब्बी अटैक पनडुब्बी है और इसमें डीजल इलेक्ट्रिक इंजन है, इसके अलावा वर्तमान में भारत के पास एक परमाणु चालित पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत भी है। इसके अलावा और कई सारे पनडु्बी निर्माण की परियोजना चल रही है।

इस पनडुब्बी निर्माण परियोजना से भारत की समुद्री क्षेत्र में रक्षा एवं सुरक्षा क्षमता ले बढ़ोतरी होगी, स्वदेशी हथियार निर्माण प्रणाली और अधिक विकसित होगी।

हिंद महासागर में चीन के बढ़ते दखल अंदाजी से भारत को अधिक से अधिक पनडुब्बी को कम समय में अपने सेना में शामिल करना होगा ताकि किसी भी स्थिति में निपटने में सक्षम हो सके।

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