HomeHISTORYHistory of Ancient India| प्राचीन भारत का इतिहास

History of Ancient India| प्राचीन भारत का इतिहास

स्त्रोत के आधार पर प्राचीन इतिहास को तीन भागों में बांटा गया है –

● प्रागैतिहासिक काल
● आद्यऐतिहासिक काल
● ऐतिहासिक काल

◆ प्रागैतिहासिक काल : –

इतिहास का वह कालखंड जिसका केवल पुरातात्विक स्रोत मिला है लिखित स्रोत नहीं मिला है उस कालखंड को “प्रागैतिहासिक काल खंड” कहते हैं।

उदाहरण के लिए : – भारतीय इतिहास में जो पाषाण काल है जिस काल में पत्थर का प्रयोग किया गया था उसे हम प्रागैतिहासिक काल के नाम से भी जानते हैं।

◆ आद्यऐतिहासिक काल : –

इतिहास का वह कालखंड जिसके पुरातात्विक स्रोत हैं और लिखित स्त्रोत भी मिले हैं लेकिन उनके लिखित स्रोत को अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है ऐसे काल को आद्यऐतिहासिक काल कहते हैं।

उदाहरण के लिए : – हड़प्पा सभ्यता या सिंधु घाटी सभ्यता। क्योंकि सिंधु घाटी सभ्यता से जो लिपि मिली है अभी तक उसे पढ़ा नहीं जा सका है इसीलिए हड़प्पा या सिंधु संस्कृति को हम आद्यऐतिहासिक काल के नाम से जानते हैं।

◆ ऐतिहासिक काल : –

इतिहास का वह कालखंड जिसमें पुरातात्विक साक्ष्य भी मिले हैं लिखित साक्ष्य भी मिले हैं और उन्हें पढ़ा भी जा सका है ऐसे काल को ऐतिहासिक काल कहते हैं।

● इस प्रकार हम प्राचीन भारत को स्त्रोतों के आधार पर तीन भागों में बांटते हैं।

● प्रागैतिहासिक काल के बारे में भारत में सबसे पहले रॉबर्ट ब्रूस फुट ने अध्ययन शुरू किया था और इस प्रकार इसकी खोजबीन की शुरुआत हुई थी।

● यदि बात करें वैश्विक स्तर पर तो 1820 में जर्गेनस थॉमसन द्वारा पाषाण काल के रूप में इसे विभाजित किया गया और इसे तीन भागों में बांटा गया पाषाण काल, कांस्य युग एवं लौह युग।

◆ पाषाण काल : – जिस काल में मानव द्वारा अपने जीवन के उपयोग के लिए पत्थरों का उपयोग किया गया उस काल को पत्थर काल अर्थात पाषाण काल कहा गया।

◆ कांस्य युग : – इस काल में मानव ने अपने जीवन में हथियारों और अन्य सुविधाओं के रूप में कांस्य के धातु का प्रयोग किया अर्थात कांस्य एक मिश्र धातु है जो तांबा और टीन से मिलकर बनती है कांस्य का उपयोग करने वाले काल को हम कांस्य युग के नाम से जानते हैं।

उदाहरण के लिए : – सिंधु घाटी सभ्यता को कांस्य युगीन सभ्यता के रूप में जाना जाता है।

◆ लौह युग : – जिस काल में मानव ने लोहे का प्रयोग किया वह काल लौह युग कहलाता है भारत में उत्तर वैदिक काल से लौह युग की शुरुआत मानी जाती है।

● भारत में पुरातात्विक विभाग के जनक “अलेक्जेंडर कनिंघम” को माना गया है।

पुरातात्विक आधारों पर पाषाण काल को तीन भागों में विभाजित किया गया है –

● पुरापाषाण काल
● मध्य पाषाण काल
● नवपाषाण काल

◆ पुरापाषाण काल : –

पुरापाषाण काल 25 लाख BC से 10 हजार BC तक माना जाता है।
BC : ईसा पूर्व
AD : ईसवी

◆ पुरापाषाण काल वह काल था जिसमें मानव ने अपने जीवन का सबसे अधिक समय बिताया था इसीलिए पुरापाषाण काल को भी तीन चरणों में बांटा गया है –

● पूर्व पुरापाषाण काल
● मध्य पुरापाषाण काल
● उच्च पुरापाषाण काल

● पुरापाषाण काल वह काल था जब मानव पूरी तरह से आदि मानव के रूप में जीवन व्यतीत करते थे जंगलों में रहना, आखेट (शिकार करना) उनका मुख्य पेशा था शिकार करने के साथ-साथ वह “खाद्य संग्राहक” की भूमिका में थे।

उदाहरण के लिए : – जब यह किसी जंगल में जाते थे तो वहां पर बहुत से जानवरों का धीरे-धीरे शिकार करते थे और जैसे ही वहां जानवरों की संख्या घट जाती थी तो वह दूसरे स्थान पर जाकर निवास करने लगते थे इस समय इन्हें “कृषि और पशुपालन” का ज्ञान नहीं था।

● पुरापाषाण काल में क्वार्टजाइट और शल्क ब्लेड आदि से बने औजार प्रयोग किए जाते थे।

● अतिरपक्कम (तमिलनाडु) तथा हथनोरा (मध्य प्रदेश) में सबसे पहले मानव खोपड़ी के प्रथम साक्ष्य (अवशेष) मिले हैं।

● भीमबेटका (मध्य प्रदेश) नर्मदा घाटी में सबसे प्राचीन चित्रकारी के प्रमाण मिले हैं इस चित्रकारी प्रमाण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल पुरापाषाण काल से संबंधित नहीं है बल्कि मध्य पाषाण काल और नवपाषाण काल से भी संबंधित हैं।

● मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) से तीनों काल के औजार मिले हैं।

● इस काल में सबसे पहले मानव द्वारा आग की खोज की गई हालांकि पुरापाषाण काल के लोगों को आग का पूर्णतया प्रयोग पता नहीं था।

◆ मध्य पाषाण काल : –

मध्य पाषाण काल 10 हजार BC से 4 हजार BC तक माना जाता है।

● मध्य पाषाण काल में जब यह प्रवेश करते हैं तो मध्य पाषाण काल में भी आखेटक (शिकारी) तो बने रहे खाद्य संग्राहक भी बने रहे लेकिन उन्होंने इस युग में पशुपालन की शुरुआत की जिसमें सबसे पहले पालतू पशु कुत्ते को बनाया गया।

● क्योंकि यह न केवल शिकार में मदद करते थे बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी उपयोगी जानवर थे।

● मध्य पाषाण काल में माइक्रोलिथ (सूक्ष्म पत्थर) का प्रयोग किया गया अर्थात प्रयोग किए जाने वाले हथियारों का आकार छोटा कर दिया गया।

● चौपानीमांडो (उत्तर प्रदेश) से मृदभांड (मिट्टी के बर्तन) के सबसे प्राचीन साक्ष्य मिले हैं।

● बागौर (राजस्थान) और आदमगढ़ (मध्य प्रदेश) से सबसे पहले पशु पालन के प्रमाण मिले हैं।

● आग का व्यावहारिक उपयोग मध्य पाषाण काल में किया गया।

◆ नवपाषाण काल : –

नवपाषाण काल 10 हजार BC से 1 हजार BC तक माना जाता है।

● मध्य पाषाण काल एवं नवपाषाण काल संक्रमण काल थे यानि कि एक ही समय में दोनों काल आगे बढ़ रहे थे।

● इस काल में कृषि की खोज हुई और कृषि एक ऐसी व्यवस्था थी जिसकी सुरक्षा के लिए वहां पर निरंतर रहना अनिवार्य था।

● नतीजा यह हुआ कि यहां के लोगों द्वारा कृषि करने के लिए पशुपालन करने की कमी महसूस की गई और कृषि को सुरक्षा देने के लिए लोग एक ही स्थान पर स्थाई रूप से रहना शुरू कर दिए और इस प्रकार यहां से स्थाई-समाज निवास प्रारंभ हुआ।

● नवपाषाण काल में हड्डियों के साथ-साथ स्लेड से बने हथियारों का प्रयोग किया गया।

● 10 हजार BC आने के आस पास आधुनिक मानव जिन्हें होमोसेपियंस कहते हैं उनका विकास हुआ था।

● बुर्जहोम (कश्मीर) से गर्तवास (गड्ढों में निवास स्थान), कब्र में मालिक के साथ कुत्ते के प्रमाण मिले हैं।

● गुफकराल (कश्मीर) से कई नवपाषाण कालीन अवशेष मिले हैं।

● चिरांद (बिहार) से पत्थर और हड्डियों के औजार मिले हैं।

● कोल्डी हवा (उत्तर प्रदेश) से चावल के प्रथम प्रमाण मिले हैं।

● इस काल में कृषि, विधिवत पशुपालन की खोज, ग्राम और बस्ती का निर्माण आदि प्रमाण देखने को मिले हैं।

● और सबसे बड़े जीवन को गति देने वाले पहिए अर्थात यातायात के लिए पहिए तथा चाक के लिए पहिए की खोज मुख्य रूप से नवपाषाण काल में हुई।

● मानव द्वारा प्रयोग में लाया गया पहला हथियार कुल्हाड़ी था।

● मानव द्वारा प्रयोग की गई पहली धातु तांबा थी।

● मानव द्वारा सबसे पहला पशुपालन कुत्ते का किया गया था।

प्राचीन इतिहास से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न : –

प्रश्न : 1 मिश्र धातु का प्रयोग किस युग में क्या गया?
उत्तर : कांस्य युग

प्रश्न : 2 भारत में पुरातात्विक विभाग का जनक किन्हें माना गया है?
उत्तर : अलेक्जेंडर कनिंघम

प्रश्न : 3 सबसे पहले मानव खोपड़ी के प्रथम साक्ष्य कहां मिले हैं?
उत्तर : अतिरपक्कम (तमिलनाडु) तथा हथनोरा (मध्य प्रदेश)

प्रश्न : 4 सबसे प्राचीन चित्रकारी प्रमाण कहां देखने को मिले हैं?
उत्तर : भीमबेटका (मध्य प्रदेश) : नर्मदा घाटी पर

प्रश्न : 5 मानव द्वारा आग की खोज किस काल में की गई?
उत्तर : पुरापाषाण काल

प्रश्न : 6 किस काल में कुत्ते को पालतू पशु बनाया गया?
उत्तर : मध्य पाषाण काल

प्रश्न : 7 मृदभांड के सबसे प्राचीन साक्ष्य कहां देखने को मिले हैं?
उत्तर : चौपानीमांडो (उत्तर प्रदेश)

प्रश्न : 8 सबसे पहले पशु पालन के प्रमाण कहां मिले हैं?
उत्तर : बागौर (राजस्थान) और आदमगढ़ (मध्य प्रदेश)

प्रश्न : 9 चावल के सबसे प्रथम प्रमाण कहां मिले हैं?
उत्तर : कोल्डी हवा (उत्तर प्रदेश)

प्रश्न : 10 पहिए की खोज किस काल में हुई?
उत्तर : नवपाषाण काल

ध्यान दें : – हमारे द्वारा प्राचीन इतिहास की पूरी सीरीज चलाई जा रही है इसके Next आर्टिकल भी आने वाले हैं जिनका लिंक आपको यहां पर देखने के लिए मिलेगा यदि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी तो आप उसको जरूर पढ़ना पसंद करेंगे।

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