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Gyanvapi Mosque 2024|मस्जिद में शिवलिंग पाया गया

नमस्कार दोस्तों,
आपसब का स्वागत है हमारे चैनल पर, आज हम आपको बताएंगे ज्ञानवापी मस्जिद जिसे कभी कभी आलमगीर मस्जिद भी कहा जाता है, जो वाराणसी मे स्थित एक विवादित मस्जिद है, इसका निर्माण कैसे हुआ?, क्या यह मस्जिद हिंदी मंदिर को तोड़कर बनाया गया है?, अगर आप इन सारे सवालों के बारे में जानना चाहते है तो हमारा यह पोस्ट पूरा जरूर पढ़ें। आज इन सारे सवालों का जवाब में आज आपको इस पोस्ट के द्वारा दूंगी।

ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid 2024) भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के बनारस में स्थित है। इसका निर्माण औरंगजेब के कहने पर 1669 एक पुराने शिव मंदिर को तोड़कर किया गया था।

Gyanvapi Mosque जिसे कभी कभी आलमगीर मस्जिद भी कहा जाता है, यह वाराणसी मे स्थित एक विवादित मस्जिद है। यह मस्जिद, काशी विश्वनाथ मंदिर से सटी हुई है। 1669 मे मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने आलमगीर से कहकर यह मस्जिद बनवाई थी। ज्ञानवापी एक संस्कृत शब्द है इसका अर्थ है “ज्ञान का कुआं”। 1991 से इस मस्जिद को हटाकर मंदिर बनाने के लिए लोग कानूनी लड़ाई लड़ रहें है।

इस स्थान में मूल रूप से एक विश्वेश्वर मंदिर था, जिसे टोडर मल ने नारायण भट्ट के साथ स्थापित किया था। नारायण भट्ट बनारस के सबसे प्रसिद्ध ब्राह्मण परिवार के मुखिया थे। 17वीं शताब्दी की शुरुआत में, जहांगीर के एक करीबी सहयोगी वीर सिंह देव बुंदेला एक संभावित संरक्षक थे। उन्होंने कुछ हद तक मंदिर का नवीनीकरण किया था। लगभग 1669 के आसपास, औरंगजेब ने मंदिर को गिराने का आदेश दिया और इसके स्थान पर Gyanvapi Mosque का निर्माण शुरू करने का आदेश दिया। मस्जिद का नाम एक पास के कुएं, ज्ञान वापी (“ज्ञान का कुआं”) से लिया गया है। पुराने लोगों का कहना था कि शिव ने इसे स्वयं शिवलिंग को ठंडा करने के लिए खोदा था।

Gyanvapi Mosque जिसे कभी कभी आलमगीर मस्जिद भी कहा जाता है, वाराणसी मे स्थित एक विवादित मस्जिद है। यह मस्जिद, काशी विश्वनाथ मंदिर से सटी हुई है। 1669 मे मुग़ल बादशाह औरंगजेब आलमगीर ने बनवाई थी।

माधुरी देसाई ने मस्जिद के इतिहास के हाल के स्टोरी को बार-बार विनाश और मूल मंदिर के फिर से बनने के लिए नोट लिखा था। उसके बाद 5 महिलाओं ने दरखास्त दर्ज करके गौरी श्रृंगार की रोज पूजा का अधिकार मांगा था।

कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के बाद ज्ञानवापी के सर्वे का आदेश दिया। और साथ ही, एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया गया था। लेकिन सर्वे के दौरान Gyanvapi Mosque में हंगामा हो गया जिसके बाद सर्वे नहीं हो पाया था। कोर्ट के आदेशानुसार ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे मई 2022 में कराया जाएगा।

वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद में तीन दिन तक चले सर्वे के बाद हिंदू पक्ष ने दावा किया है कि मस्जिद में शिवलिंग पाया गया है. दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष इसे वज़ूख़ाने में लगा फ़व्वारा बता रहा है.

इसके बाद स्थानीय अदालत ने उस जगह को सील करने का आदेश दिया. Gyanvapi Mosque की मैनेजमेंट कमिटी की अपील पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो सकती है.

वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर और उससे सटी हुई Gyanvapi Mosque, दोनों के निर्माण और पुनर्निमाण को लेकर कई तरह की धारणाएँ हैं, ऐसा माना जाता है कि काशी विश्वनाथ मंदिर को औरंगज़ेब ने तुड़वा दिया था और वहां मस्जिद बनाने का आदेश दिया था।

बीबीसी से बातचीत में सैयद मोहम्मद यासीन का कहना है कि, “ज़्यादातर लोग तो यही मानते हैं कि मस्जिद अकबर के ज़माने में बनी थी। औरंगज़ेब ने मंदिर को तुड़वा दिया था, क्योंकि वो ‘दीन-ए-इलाही’ को मानते नहीं थे। मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनी हो, ऐसा नहीं है।

यह मंदिर से बिल्कुल अलग है। ये जो बात कही जा रही है कि यहां कुआँ है और उसमें शिवलिंग है, तो यह बात बिल्कुल गलत है। साल 2010 में हमने कुएँ की सफ़ाई कराई थी, वहां ऐसा कुछ भी नहीं था।”

काशी विश्वनाथ मंदिर मामले में दावे का समर्थन करने वाले विजय शंकर रस्तोगी कहते हैं कि औरंगज़ेब ने अपने शासन के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़ने का फ़रमान तो जारी किया था। लेकिन, उन्होंने मस्जिद बनाने का फ़रमान नहीं दिया था। रस्तोगी के मुताबिक, मस्जिद बनाने के लिए मंदिर को तोड़ा गया था।

बहुत सारे इतिहासकारों का कहना अलग अलग है, इसीलिए किसी भी बात का पुष्टि करना बहुत मुश्किल है, लेकिन कोर्ट ने फैसला हिंदू के हित में किया है जिससे अब हिंदू ज्ञानवापी के अंदर पूजा कर सकते है।

मस्जिद के पीछे की दीवार हिंदू शैली में बनी हुई है, जो कि एकदम मंदिर जैसी दिखती है। हिंदू पक्षकारों का दावा है कि मंदिर को औरंगजेब ने तोड़ दिया था और ऊपर से आंशिक रूप से मस्जिद का निर्माण कर दिया था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ज्ञानवापी परिसर में ही मां शृंगार गौरी, भगवान गणेश, हनुमान, आदि विश्वेश्वर, नंदीजी और कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी हैं।

Gyanvapi Mosque की पश्चिमी दीवार पर घंटी की आकृतियां भी बनी हुई हैं। कहीं श्री, ॐ आदि लिखे हुए हैं। वहीं मस्जिद की ओर मुंह किए हुए नंदी की विशाल मूर्ति भी है।

Conclusion:

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धन्यवाद!

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Randheer Rawat
Randheer Rawat
नमस्कार दोस्तों, मैं रणधीर रावत Hindiradio.in का Technical Author हूँ. Education की बात करूँ तो मैं एक B.com Graduate हूँ. मुझे नयी नयी चीज़ों को सीखना और दूसरों को सिखाने में बड़ा अच्छा लागता है.
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