भारत के दक्षिण में स्थित पड़ोसी देश श्रीलंका में इन दिनों खाने की वस्तु की उपलब्धता को लेकर समस्या हो गई है। इसका मुख्य कारण श्रीलंका का foreign reserve (विदेशी मुद्रा भंडार) में कमी होना।
आइए इस के बारे में जानने से पहले कुछ श्रीलंका के बारे में जानते हैं।
श्रीलंका हिंद महासागर में स्थित एक द्विपीय देश है । इसे हिंद महासागर का मोती भी कहा जाता है। भारत से श्रीलंका का संबंध रामायण काल से ही है। भारत से इसकी दूरी मात्र 31 किलोमीटर है। इसका क्षेत्रफल 65610 sq km, तथा इसकी आबादी 2.18 crore (2019 के अनुसार) है ।
1948 को श्रीलंका को अंग्रेजों से आजादी मिली। 1972 तक इसका नाम सिलोन उसके बाद 1972 से 78 तक लंका ,1978 से अब तक इसका नाम श्रीलंका है। इसकी पहली राजधानी केडी , बाद में कोलंबो तथा वर्तमान में इसकी राजधानी श्री जयवर्धनेपूरा है। यहां पर रहने वाले लोगों में ज्यादातर बौद्ध ,हिंदू, मुस्लिम धर्म के लोग हैं । यहां पर बोली जाने वाली मुख्य भाषा सिहंली तथा तमिल है । वर्तमान में श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे हैं।
खाद्य समस्या :-
श्रीलंका में आवश्यक खाने के सामान जैसे चावल ,शुगर, आलू ,प्याज, दूध ,पाउडर आदि की कमी हो गई है. इसके साथ ही मिट्टी तेल रसोई गैस आदि की दुकानों पर भी लंबी – लंबी लाइने है। Sri Lanka यह सब चीज बाहर के देशों से मंगवाता है ,इसके लिए उसके बदले में अपने पास जमा foreign reserve जो कि डॉलर में होता है वह देता है। लेकिन 2019 से ही श्रीलंका के फॉरेन रिजर्व लगातार घट रहे थे। जिसके चलते अब श्रीलंका के पास बहुत ही कम फॉरेन रिजर्व बचा है। जोकि 2.8 बिलियन डॉलर है । इसीलिए सरकार ने आवश्यक सामानों को सीमित मात्रा में लोगों को देने के लिए food emergency की घोषणा की है ।
दुकानदारों द्वारा आवश्यक सामानों को जमा करने तथा लोगों द्वारा ज्यादा से ज्यादा खरीद कर अपने पास जमा करने से रोकने के लिए तथा सभी लोगों को सीमित मात्रा में मिले इसके लिए सेना के एक अधिकारी को ‘जरूरी सेवा आयोग’ ( commission general of essential services ) के cheif के रूप में नियुक्त किया गया है ताकि यह व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके। श्रीलंका सरकार ने कुछ समय पहले से ही अपने फॉरेन रिजर्व को बचाने के लिए कृषि, रसायन, कार और हल्दी जैसे मसालों को आयात करने पर रोक लगा दी थी। ताकि इससे बचे पैसे को अन्य जरूरी सामान खाना, दवाइयां ,वैक्सीन आदि खरीदने में लगाया जा सके। श्रीलंका के उर्जा मंत्री ने कहा कि लोग वाहनों का कम से कम उपयोग करें ताकि पेट्रोलियम पदार्थों का कम से कम आयात करना पड़े।
फॉरेन रिजर्व कम होने का कारण:-
श्रीलंका के पास 2019 में total फॉरेन रिजर्व 7.5 बिलियन डॉलर था। जोकि गिरकर जुलाई 2021 से पहले 4 बिलियन डॉलर और उसके बाद 2.1 billion डॉलर बचा है।
इसका मुख्य कारण 2019 से श्रीलंकाई रुपैया डॉलर के मुकाबले गिरना आरंभ हो गया अब तक 20 पर्सेंट तक गिर गया। श्रीलंका के वर्तमान सरकार ने रसायनिक कृषि के स्थान पर जैविक कृषि को बढ़ावा देने लगे , जिस कारण श्रीलंका के द्वारा सबसे ज्यादा निर्यात की जाने वाली वस्तु चाय की उपज में कमी आई। जोकि श्रीलंका का फॉरेन रिजर्व प्राप्त करने का एक बड़ा साधन था। इसके साथ ही अन्य खाद्य वस्तुओं की उपज में भी कमी आई जोकी खाद्य समस्या का प्रमुख कारण है। श्रीलंका का आयात ज्यादा और निर्यात का कम होना। श्रीलंका सरकार द्वारा अत्यधिक कर्ज का लेना। जिस कारण उसके ब्याज को चुकता करने के लिए फॉरेन रिजर्व का इस्तेमाल करना। जानकारी अनुसार श्रीलंका को अगले 12 महीना में 1.3 बिलीयन डॉलर का ब्याज भुगतान करना है। पहले के समय में जारी की गई श्रीलंका सरकार द्वारा bond का maturity date पूरा होना। जिसके लिए जुलाई में एक बिलियन डॉलर का Bond राशि वापस किया गया। श्रीलंका का अर्थव्यवस्था पर पर्यटन क्षेत्र का बहुत बड़ा योगदान था। परंतु कोरोनावायरस के चलते इस क्षेत्र में मंदी आ जाने के कारण भी फॉरेन रिजर्व में कमी आया ।
आगे की राह और समाधान :-
श्रीलंका को IMF, WORLD BANK जैसी संस्था से कर्ज लेना होगा। चाइना, इंडिया, अमेरिका से loan लेना या कुछ राशि का सहायता प्राप्त करना होगा ।Swap dept process को अपनाना, इसके तहत अन्य देश डॉलर में मुद्रा देंगे, बदले में देश धीरे-धीरे करके श्रीलंका रुपया में कर्ज वापस करेगा।