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2021 इंजीनियर्स डे क्यों मनाया जाता है, कौन है मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया

इंजीनियर दिवस।

आज के समय में लोगों के पास जो सुख सुविधा है, मोबाइल, कंप्यूटर जैसे अनेक इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं, मेडिकल के उपकरण , बड़े-बड़े इमारत, पुल, सड़क , बांध, छोटी सुई से लेकर बड़े बड़े जहाज , हथियार , गाड़ियां , बिजली के बल्ब जैसी कई अन्य चीजें जो मानव जीवन को सुगम और आरामदायक बनाते हैं।
इन सभी के पीछे एक समूह विशेष का विशेष योगदान है। वह है अभियंता (Engineer).

15 सितंबर को भारत में इंजीनियर दिवस के रूप में मनाया जाता है। इंजीनियर दिवस भारत के महान इंजीनियर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के जन्मदिवस पर मनाया जाता है।इंजीनियर लेटिन भाषा के इंजीनियम से निकला है। जिसका अर्थ होता है:- स्वाभाविक निपुणता या चतुराई। यूनेस्को द्वारा 4 मार्च को विश्व इंजीनियर दिवस मनाया जाता है।भारत में पहली बार इंजीनियर दिवस मनाने की शुरुआत 1968 में हुआ है। 15 सितंबर 2021 को मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की 161 जयंती है। इस दिन को विज्ञान और भौतकी की दुनिया में विश्वेश्वरैया की उल्लेखनीय योगदान के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है।

कौन है मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया:-

इनका जन्म 15 सितंबर 1861 को कर्नाटक के मुद्दनहाली गांव में हुआ। इनके पिता श्रीनिवास शास्त्री संस्कृत के विद्वान और आयुर्वेद चिकित्सक थे। माता का नाम बैंकाचम्मा था ।

उन्होंने अपने प्रारंभिक शिक्षा जन्म स्थान से प्राप्त किया और स्कूली शिक्षा के पश्चात मद्रास विश्वविद्यालय से B.A ( कला) किया। उसके बाद बदलाव करते हुए कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग पुणे से सिविल इंजीनियरिंग में शिक्षा प्राप्त किया।

इनके द्वारा किए गए कार्य:-

इनका योगदान विशेष रूप से जल संसाधनों के दोहन , बांध ,पुलों के डिजाइन और शिक्षा प्रणाली में क्रांति लाने के लिए किए गए प्रयासों के क्षेत्र में है।

इन्होंने उस समय के मैसूर राज्य और आज के कर्नाटक में उस समय के एशिया का सबसे बड़ा बांध कृष्णा राज सागर बांध का कावेरी नदी पर निर्माण करवाया।

इन्होंने पुणे के खड़कवासला जलाशय और ग्वालियर का तिगड़ा बांध का भी निर्माण किया। इन्हें हैदराबाद शहर के विकास और बाढ़ सुरक्षा प्रणाली के डिजाइन के पीछे योगदान के लिए भी जाना जाता है ।

इन्होंने विशाखापट्टनम बंदरगाह को समुद्री कटाव से बचाव की प्रणाली को विकसित किया।

सिंधु नदी से सुककूर कस्बे में पानी मोड़ कर भेजने में इनका योगदान रहा। इन्हें उड़ीसा और बिहार में रेलवे लाइन के विकास के पीछे दिए गए योगदान के लिए भी जाना जाता है। पटना के गंगा नदी पर राजेंद्र सेतु के लिए भी जाना जाता है।

इनके साथ एक रोचक कहानी भी जुड़ी हुई है। एक बार मोझगुंडम विश्वेश्वरैया ट्रेन पर सफर कर रहे थे । अचानक उन्होंने ट्रेन की जंजीर को खींचते है और ट्रेन रुक जाती है। गार्ड ने पूछा, तुमने ऐसा क्यों किया ? तो बताया की ट्रेन की पटरी आगे कुछ दूरी पर टूटी हुई है। जिसका पता उन्होंने पटरी की आवाज और गाड़ी की स्वाभाविक गति में अंतर से लगाया और सच में पटरी आगे कुछ दूरी पर टूटी हुई थी।

उन्होंने 1935 में प्लान इकोनॉमिक ऑफ इंडिया नाम की बुक भी लिखिए। इन्हें भारत के आर्थिक नियोजन का पिता भी कहा जाता है।

विश्वेश्वरैया 1912 से 18 तक मैसूर राज्य के दीवान भी रहे और इन्होंने मैसूर के विकास के लिए अनेक कार्य किए। जैसे- मैसूर में साबुन फैक्ट्री को लगवाना आयरन और स्टील फैक्ट्री को लगवाना , मैसूर चेंबर ऑफ कॉमर्स के स्थापना , कई सारे कॉलेज और विद्यालय का निर्माण । इसलिए इन्हें आधुनिक मैसूर का जनक कहा जाता है।

विश्वेश्वरैया को प्राप्त सम्मान:-

इन्हें ब्रिटिश किंग जॉर्ज पंचम के द्वारा नाइटहुड की उपाधि दी गई। 1955 में भारत के नागरिक सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया । इन्हें लंदन कॉलेज के द्वारा सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया।

रोचक तथ्य :-

  • भारत के पहले इंजीनियर एम विश्वेश्वरैया थे तथा पहली महिला इंजीनियर ए ललिथा।
  • भारत में करीब 3500 इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थान और करीब 3400 पॉलिटेक्निक कॉलेज है ।
  • भारत में हर साल करीब 10 लाख लोग इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त करते हैं । आईआईटी मद्रास ,आईआईटी दिल्ली, आईआईटी बॉम्बे ,वर्तमान में टॉप 3 इंजीनियरिंग कॉलेज है।
  • इंजीनियरिंग के मैकेनिकल ब्रांच को मदर , फादर एंड किंग आल ब्रांच कहा जाता है।
    सबसे कठिन मैकेनिकल ब्रांच को और सबसे पॉपुलर तथा आसान कंप्यूटर साइंस ब्रांच को माना जाता है।
  • इंजीनियरिंग के सबसे मुश्किल प्रोजेक्ट प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर को जोड़ने वाली पनामा नहर निर्माण को माना जाता है।
  • गीजा के पिरामिड को विश्व के सबसे पुराना और सही सलामत इंजीनियरिंग नमूने माना जाता है।
  • भारत के अलावा श्रीलंका और तंजानिया भी 15 सितंबर को इंजीनियर दिवस मनाते हैं ।
    इसके अलावा बांग्लादेश 7 मई , 24 फरवरी, इटली 15 जून , बेल्जियम 20 मार्च और तुर्की 5 दिसंबर को इंजीनियर दिवस मनाता है।
  • प्रसिद्ध इंजीनियर :- निकोला टेस्ला ,जे जे थॉमसन, हेनरी फोर्ड, ग्राहम बेल , एलन मस्क, सुंदर पिचाई , एपीजे अब्दुल कलाम , ई श्रीधरण, सतीश धवन , नारायण मूर्ति ,सत्य नडेला आदि है।
  • भारत के इंजीनियर जो इंजीनियरिंग के बजाए अन्य क्षेत्र में भी प्रसिद्ध है। जैसे अरविंद केजरीवाल, नीतीश कुमार (राजनीतिज्ञ) , चेतन भगत (लेखक ), सोनू सूद (अभिनेता ) शंकर माधवन (गायक ) अनिल कुंबले आर अश्विन ( खिलाड़ी) एवं अन्य ।
  • भारत में अनेक महान इंजीनियर हुए जिन्होंने भारत के अलावा विदेशों में भी अपना नाम रोशन किया। आज भी विश्व के बड़े बड़े कंपनी में बहुत सारे भारतीय इंजीनियर ऊंचे पदों पर काम करते हैं।
  • लेकिन भारत में इंजीनियरों की हालत काफी खराब है । कुछ समय पहले किसी राज्य के peon के पदों की भर्ती के लिए ढेर सारे इंजीनियर ने आवेदन किया था । लाखों इंजीनियर इंजीनियरिंग करने के बाद बेरोजगार बैठे हैं या फिर इंजीनियरिंग के अलावा कोई अन्य काम कर रहे हैं।

इसकी वजह है :-

  • भारत में रोजगार के अवसर की कमी होना।
  • भारत में इंजीनियरिंग शिक्षा की गुणवत्ता विश्वस्तरीय स्तर पर काफी नीचे रहना । आज भी भारत के शिक्षण संस्थान विश्व के टॉप शिक्षण संस्थानों के रैंकिंग में काफी नीचे रहते हैं।
  • इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थानों में प्रैक्टिस एवं रिसर्च पर काफी कम ध्यान देना। इसके बजाय किताबी ज्ञान पर जोर देकर डिग्री प्राप्त करना।
  • अधिकांश स्टूडेंट को भाषाई ज्ञान (कम्युनिकेशन स्किल) में परेशानी होना । इससे कई कंपनियां जॉब नहीं देती है ।
  • स्टूडेंट द्वारा स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान नहीं देना ।

उपाय:-

  • हमारी शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने के लिए उसके गुणवत्ता में सुधार करना ।
  • किताबी ज्ञान के बजाय अनुसंधान एवं प्रैक्टिस पर ध्यान देना।
  • स्टूडेंट तकनीकी कौशल का विकास कर खुद से रोजगार सृजन करने के लायक बनना।
  • कम्युनिकेशन स्किल पर ध्यान देना आदि।

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