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सिम्हाद्री सोलर पावर प्लांट: विशाखापट्टनम देश का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट प्रोजेक्ट

सिम्हाद्री में बना तैरता हुआ Solar Power Plant :- 

आज के समय में ऊर्जा की समस्या एक प्रमुख समस्या है।  

बढ़ती हुई ऊर्जा के मांग को पूरा करने के लिए परंपरागत ऊर्जा स्रोतों से ऊर्जा की प्राप्ति से ऊर्जा की आपूर्ति के साथ-साथ पर्यावरण, मानव जीवन की हानि तथा ऊर्जा स्रोत में कमी भी होती है।  इसीलिए दुनिया के तमाम देशों के साथ भारत भी नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपना ध्यान दे रहा है।  भारत 1973 से उन देशों में शामिल है जो ऊर्जा के नए स्रोत का इस्तेमाल करने के लिए अनुसंधान एवं विकास पर काम कर रहे है।  

भारत में ऊर्जा के सभी नए स्रोत जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा ,जल ऊर्जा ,वायु ऊर्जा ,हाइड्रोजन ऊर्जा, परमाणु ,समुद्री ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा से ऊर्जा की प्राप्ति हो रही है एवं इस नवीन ऊर्जा स्रोत विकास के लिए कई तरह की रणनीति एवं उस पर खर्च किया जा रहा है।  

इसी उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा 2018 में अधिसूचित flexibilization योजना के तहत पहली तैरती (floating) हुई सोलर पावर प्लांट NTPC ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में सिम्हाद्री थर्मल पावर स्टेशन के जलाशय पर आरंभ किया।  

सिम्हाद्री पावर प्लांट के बारे में जानकारी :-

इस पावर प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता 25 MW (Mega watt) है।  यह प्लांट 75 acres जलाशय में फैला हुआ है।  इसमें 1 लाख PV modules से बिजली उत्पादन करने की क्षमता है। इससे उत्पन्न बिजली से 7000 से अधिक घरों में रोशनी देने के साथ-साथ 46000 टन कार्बन उत्सर्जन प्रति वर्ष में कमी भी होगी।  इसके साथ 1300 million liter /year पानी का वार्षिक बचत भी होगी। एनटीपीसी 2032 तक 60 गीगा वाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। एनटीपीसी ऊर्जा पर संयुक्त राष्ट्र उच्च स्तरीय ऊर्जा वार्ता के हिस्से के रूप में अपने ऊर्जा कंपैक्ट लक्ष्य को घोषित करने वाला भारत की पहली ऊर्जा कंपनी बनी है।  

About NTPC-

NTPC भारत के 10 महारत्न कंपनी में से एक हैं।  इसकी स्थापना 1975 में हुई यह भारत के ऊर्जा के क्षेत्र में सबसे बड़ी कंपनी है।  इसे 2010 में भारत में कंपनी का दर्जा प्राप्त हुआ।  

◆ भारत का नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन लक्ष्य 2022 तक 175 GW, 2030 तक 450 GW तथा 2047 तक ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का है।  

◆ भारत का पहला सोलर प्लांट 2014 में कोलकाता में लगाया गया तथा विश्व का पहला सोलर प्लांट 1982 में अमेरिका में लगाया गया था।  

◆ विश्व का सबसे बड़ा सोलर प्लांट Bhadla सोलर प्लांट राजस्थान जिस की उत्पादन क्षमता 2245 मेगा वाट है।  

◆ विश्व का सबसे बडा तैरता ( floating) solar प्लांट भारत,  मध्य प्रदेश के नर्मदा नदी पर ओंकारेश्वर बांध पर 2022 -23 तक बनाने जा रहे हैं जिसकी  उत्पादन क्षमता 600 मेगा वाट होगी।  

सोलर प्लांट के फायदे :-

सौर ऊर्जा, ऊर्जा का कभी ना खत्म होने वाला स्रोत है।  इससे किसी भी प्रकार का प्रदूषण नहीं होता है।  इससे परंपरागत ऊर्जा स्रोतों पर से निर्भरता को कम किया जा सकता है तथा उससे होने वाले हानि से भी बचाव किया जा सकता है।  इससे जहां पर बिजली की पहुंच नहीं है वहां पर भी बिजली की सुविधा प्रदान किया जा सकता है।  

तैरता हुआ सोलर प्लांट बनाने से भूमि अधिकरण, ग्रिड कनेक्टिविटी में आसानी, विनियम संबंध में सुविधा के साथ जल निकाय के शीतलन प्रभाव से प्लांट का क्षमता भी बढ़ता है।  

सोलर प्लांट से होने वाली परेशानी:-

  • इसका प्रारंभिक लागत अधिक होता है एवं यह सभी मौसम में सही से काम नहीं कर सकता है।  
  • इसके साथ ही इसकी यह भूमि का अधिक अधिग्रहण करता है।
  • तैरता हुआ सोलर प्लांट में होने वाली परेशानियों में है, जमीन की अपेक्षा पानी में लगाने से ज्यादा खर्च होना, उसके रखरखाव संबंधी परेशानी, उसके सुरक्षा संबंधी परेशानी के साथ-साथ जंग लगने की समस्या भी होती है।

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